
रुड़की और देहात क्षेत्र में बीत गए साल में हादसों में 115 लोगों की मौत के बाद भी प्रशासन और शासन की नींद नहीं टूट सकी है। न तो कोई ट्रैफिक प्लान है और न ही कोई संसाधन। साल दर साल मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। वाहनों के नियंत्रण का जिम्मा मात्र 10 सिपाही और एक टीएसआई के भरोसे चल रहा है।
चौंकाने वाली बात तो यह है कि जिले में जहां एसपी तथा सीओ ट्रैफिक तैनात हैं, वहीं रुड़की में ट्रैफिक व्यवस्था के लिए अधिकारी नहीं हैं।
कहने को तो पुलिस हर साल सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाती है, लेकिन ये कागजों पर ज्यादा, धरातल पर कम दिखता है। एक साल के भीतर लचर यातायात व्यवस्था के चलते 115 लोगों की जान जा चुकी है।
रोज गुजरते हैं दस हजार वाहन
दिलचस्प बात यह है कि शहर में हर दिन करीब 10 हजार से अधिक वाहन दौड़ लगाते है। इनके नियंत्रण के लिए मात्र 10 सिपाही और एक टीएसआई ही तैनात है। जबकि हरिद्वार में एसपी ट्रेफिक तथा सीओ ट्रेफिक का पद सृजित किया गया है।
हरिद्वार के मुकाबले रुड़की में ट्रैफिक कम नहीं है, लेकिन यहां पर अधिकारी की तैनाती नहीं है। व्यापारी नेता नवीन गुलाटी का कहना है कि कई बार अधिकारियों से शहर में ट्रैफिक अधिकारी की तैनाती की मांग करने के बाद भी संख्या बल नहीं बढ़ सका है।
